नाली विवाद पर प्रशासन की चुप्पी से कस्बा वासियों का जीवन बना नरकीय
नाली विवाद पर प्रशासन की चुप्पी से कस्बा वासियों का जीवन बना नरकीय
- जिम्मेदार अधिकारियों का सरकार की मंशा के विपरीत काम करने का आरोप
नाथनगर/संतकबीरनगर। स्थानीय कस्बा महुली में बीते क़रीब 25 दिनों से चला आ रहा नाली विवाद गहराता जा रहा है। प्रशासन की चुप्पी भविष्य में किसी बड़ी घटना की ओर को इशारा कर रही है। प्रशासन के रवैए से ग्रामीणों में काफ़ी आक्रोश है। स्थानीय कस्बा महुली में बीते 25 दिनों से नाली का विवाद चला आ रहा है। स्थानीय थाना अंतर्गत ग्राम महुलिया खुर्द निवासी कुछ लोगों ने अपनी ज़मीन बताकर 50 वर्षों पुरानी नाली को पाट दिया है। जिससे जलनिकासी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। परेशान ग्रामीण लगातार प्रशासन से जलनिकासी की व्यवस्था बहाल कराने की गुहार लगा रहे हैं। नाली बंद होने से जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी किसी प्रकार का संज्ञान नहीं ले रहे हैं। जिससे सड़क पर पचीस दिनों से गंदा पानी लबालब भरा हुआ है। लोगों को मजबूर होकर इसी गंदे पानी से गुजरना पड़ रहा है।
स्कूली बच्चे भी इसी गंदे पानी से होकर रोज स्कूल जाते हैं। करीब दो दर्जन से अधिक घरों का पानी अवरुद्ध होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। संक्रामक रोग फैलने की आशंकाएं ग्रामीणों ने व्यक्त की है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ लोगों ने जबरिया निर्माण कराकर पानी रोक दिया है। जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है। पूर्व में आक्रोशित भीड़ और विपक्षियों के बीच झड़प भी हो चुकी है। विपक्षियों द्वारा पांच नामजद व दर्जन भर से अधिक अज्ञात लोगों के विरुद्ध इस संबंध में मुकदमा भी स्थानीय थाने में दर्ज कराया गया है। नाली विवाद का समाधान न होने से कस्बा वासियों के अलावा आस-पास के गांव लोगों को भी काफ़ी समस्याएं हो रही हैं। क्यों कि बाज़ार से होते हुए भारतीय स्टेट बैंक और महुली-नाथनगर मार्ग से खलीलाबाद जाने के लिए वाहन भी यहीं से मिलता है। जल-जमाव के कारण लोगों का इस रास्ते से जाना अब दूभर हो गया है।
प्रशासन की ढिलाई के कारण विपक्षियों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों की समस्या का कोई समाधान नहीं हो पा रहा है। हालांकि की इस प्रकरण की जानकारी तहसीलदार धनघटा के अलावा एसडीएम व जिला अधिकारी को भी है। बावजूद इसके न जाने सबने क्यों चुप्पी साध रखी है। इस समस्या का कोई उचित समाधान प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नहीं किया जा रहा है। छोटे छोटे स्कूल जाने वाले बच्चों की समस्या का किसी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा संज्ञान न लिया जाना सरकार की स्वच्छ छवि को दाग़दार बनाया जा रहा है। जिससे आमजन का सरकार से भरोसा अब उठता जा रहा है।
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