दो सगे भाईयों समेत गैंगस्टर एक्ट के चार आरोपियों को सात वर्ष का कारावास, एक लाख 20 हजार का अर्थदण्ड
दो सगे भाईयों समेत गैंगस्टर एक्ट के चार आरोपियों को सात वर्ष का कारावास, एक लाख 20 हजार का अर्थदण्ड
-एडीजे फास्ट ट्रैक व विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट के कोर्ट का फैसला
संतकबीरनगर। विधि संवाददाता। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक द्वितीय एवं विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट डा. दिव्यानन्द द्विवेदी की कोर्ट ने दो सगे भाईयों समेत गैंगस्टर एक्ट के चार आरोपियों को दोषसिद्ध करार देते हुए सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। आरोपी रामशिव चौधरी व मुन्ना उर्फ जितेन्द्र चौधरी सगे भाई एवं भोंदू उर्फ चन्द्र प्रकाश तथा दिलीप चौधरी पर गैंग बनाकर संगठित अपराध करने का आरोप लगाया गया था। कोर्ट ने प्रत्येक आरोपी पर सजा के साथ तीस-तीस हजार रुपए कुल एक लाख 20 हजार रुपए का अर्थदण्ड भी लगाया है। अर्थदण्ड का भुगतान न करने पर आरोपियों को एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगा। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी फौजदारी अभिमन्युपाल व सत्येन्द्र शुक्ल ने बताया कि प्रकरण में तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक कोतवाली खलीलाबाद लालचन्द भारती ने अभियोग पंजीकृत कराया था। उनका आरोप था कि दिनांक एक अक्टूबर 2004 को रात लगभग 11 बजकर 50 मिनट पर वह पुलिस बल के साथ चेकिंग गश्त एवं देखभाल क्षेत्र भ्रमण पर थे। इसी बीच पता चला कि राम शिव चौधरी पुत्र इन्द्रजीत चौधरी ग्राम बारीगांव थाना कोतवाली खलीलाबाद शातिर किस्म का गिरोबन्द अपराधी है। इसके गैंग में मुन्ना उर्फ जितेन्द्र चौधरी पुत्र इन्द्रजीत चौधरी, भोंदू उर्फ चन्द्र प्रकाश पुत्र लल्लू प्रसाद ग्राम बारीगांव कोतवाली खलीलाबाद तथा दिलीप चौधरी पुत्र राजेन्द्र प्रसाद ग्राम डड़इया थाना लालगंज जनपद बस्ती सदस्य हैं। इनका संगठित गिरोह है तथा यह अपराध करने के अभ्यस्त अपराधी है। इनका इतना आतंक व भय व्याप्त है कि इनके विरुद्ध कोई भी व्यक्ति गवाही देने के लिए तैयार नहीं है। इन आरोपियों के विरुद्ध हत्या, अपहरण के अनेक आपराधिक अभियोग पंजीकृत है। पुलिस ने इन आरोपियों के विरुद्ध गिरोहबंद अधिनियम का अभियोग पंजीकृत करके विवेचना के उपरांत आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अभिमन्युपाल ने बताया कि पक्षों की बहस सुनने के पश्चात अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक द्वितीय व विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट डा. दिव्यानन्द द्विवेदी की कोर्ट ने आरोपियों को दोषसिद्ध करार देते हुए सात वर्ष के कारावास का सजा सुनाया।
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