-खलीलाबाद कोतवाली में टूटेगा दो दशक पुराना खौफ, पहली बार फिर सजेगी कृष्ण जन्माष्टमी, कोतवाल ने शुरू की तैयारी
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी को लेकर पूरे देश में तैयारियां चल रही हैं। जिले के सभी नौ थाना क्षेत्रों में भी जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
-खलीलाबाद कोतवाली में टूटेगा दो दशक पुराना खौफ, पहली बार फिर सजेगी कृष्ण जन्माष्टमी
-हादसे के बाद बंद हो गया था आयोजन, मंदिर निर्माण के बाद बदला माहौल; एसपी के उत्सवर्धन पर कोतवाल ने शुरू की तैयारी
संतकबीरनगर। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी को लेकर पूरे देश में तैयारियां चल रही हैं। जिले के सभी नौ थाना क्षेत्रों में भी जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। लेकिन खलीलाबाद कोतवाली में पिछले करीब 20 वर्षों से जन्माष्टमी का आयोजन नहीं हुआ। इस बार कोतवाली परिसर में जन्माष्टमी मनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। लंबे समय से चली आ रही इस परंपरा को बदलने की पहल कोतवाल जयप्रकाश दुबे ने की है। वर्ष 1898 में अस्तित्व में आई खलीलाबाद कोतवाली ऐतिहासिक खलीलाबाद किले में संचालित होती है। कोतवाली के आसपास प्रसिद्ध किला और मां समय माता मंदिर स्थित है। ऐतिहासिक महत्व वाले इस परिसर में पुलिस की गतिविधियां लंबे समय से संचालित होती रही हैं। हालांकि, जन्माष्टमी का पर्व यहां करीब दो दशक से नहीं मनाया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार करीब 20 वर्ष पहले जन्माष्टमी का आयोजन मग हर पुलिस चौकी में किया जाता था। जन्माष्टमी के दिन तत्कालीन कोतवाल और दीवान बाइक से मगहर जा रहे थे।
इसी दौरान रास्ते में सड़क हादसा हो गया, जिसमें दोनों की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस विभाग और स्थानीय लोगों में शोक का माहौल बन गया। इसके बाद जन्माष्टमी के आयोजन को लेकर एक तरह का भय लोगों के मन में बैठ गया। धीरे-धीरे खलीलाबाद कोतवाली में जन्माष्टमी का आयोजन बंद हो गया। हालांकि, जिले के दूसरे थाना परिसरों में जन्माष्टमी का पर्व लगातार मनाया जाता रहा। इस वर्ष खलीलाबाद कोतवाली में माहौल बदलने की शुरुआत जुलाई महीने में हुई। पुलिस कप्तान संदीप मीणा के उत्सवर्धन और कोतवाल जयप्रकाश दुबे की पहल पर कोतवाली परिसर में मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर में विधिवत प्राण प्रतिष्ठा कराई गई। परिसर में पिपलेश्वर जी महाराज की स्थापना की गई। पुलिस विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि हादसा किसी भी समय और किसी भी कारण से हो सकता है।
किसी दुर्घटना को किसी धार्मिक पर्व से जोड़कर उसके प्रति भय की भावना बनाए रखना उचित नहीं है। इसी सोच के साथ इस बार जन्माष्टमी का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ पुलिसकर्मियों और आम लोगों के बीच बेहतर संबंध बनाना भी है। खलीलाबाद कोतवाली में इस बार जन्माष्टमी का आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि करीब दो दशक से यहां यह पर्व नहीं मनाया गया। ऐतिहासिक किले में संचालित कोतवाली परिसर में पहली बार लंबे अंतराल के बाद जन्माष्टमी की तैयारियां होना स्थानीय लोगों के लिए भी चर्चा का विषय है। जिले में कुल नौ थाने हैं और सभी थाना क्षेत्रों में जन्माष्टमी अलग-अलग तरीके से मनाई जाती है। ऐसे में खलीलाबाद कोतवाली में जन्माष्टमी का आयोजन एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। मंदिर निर्माण के बाद शुरू हुई धार्मिक गतिविधियों ने भी इस आयोजन के लिए माहौल तैयार किया है।
इस बार जन्माष्टमी के अवसर पर कोतवाली परिसर में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की जाएगी और जन्मोत्सव मनाया जाएगा। वर्षों से चली आ रही धारणा के बीच यह आयोजन पुलिसकर्मियों के साथ-साथ आसपास के लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा। इस बारे में बात करने पर पुलिस कप्तान संदीप मीना ने कहा कि जन्माष्टमी के दिन 20 साल पहले किसी दुर्घटना की जानकारी मुझे नहीं है मंदिर बनवाया गया है जन्माष्टमी कोतवाली में मनाई जाएगी।
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