संतकबीरनगर में बाढ़ प्रभावितों को बसाने के बाद जिम्मेदार भूले, बिजली-पानी और आवास के लिए भटक रहे ग्रामीण
सरयू नदी की भीषण बाढ़ में सब कुछ गंवाने वाले गायघाट के दर्जनों परिवार आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। बाढ़ के दौरान अपना घर, जमीन और आशियाना खो चुके परिवारों को प्रशासन द्वारा जिगना ग्राम सभा के उत्तरी पश्चिमी छोर पर बसाया तो गया, लेकिन उन्हें आज तक जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा सकीं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुनर्वास के नाम पर उन्हें सिर्फ बसाकर छोड़ दिया गया और उसके बाद जिम्मेदार अधिकारियों ने उनकी सुध तक नहीं ली। विदित हो कि सरयू नदी में आई भीषण बाढ़ के दौरान गायघाट के लगभग 130 घर नदी की कटान में समा गए थे।
इसके बाद प्रभावित परिवार लंबे समय तक एमबीडी महाबांध पर खुले आसमान के नीचे परिवार सहित रहने को मजबूर रहे। बाद में प्रशासन द्वारा जिगना क्षेत्र में बालू और ताल की जमीन पर उन्हें बसाया गया तथा भरोसा दिलाया गया कि सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी, लेकिन समय बीतने के बावजूद न बिजली की व्यवस्था हो सकी और न ही पेयजल तथा आवास की सुविधा उपलब्ध कराई गई। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में पूरी बस्ती जलभराव की चपेट में आ जाती है जबकि रात होते ही अंधेरे के कारण भय का माहौल बना रहता है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और महिलाओं को पेयजल के लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ता है।
पुनर्वास स्थल पर रह रहे मतीरा देवी, शांति देवी, इसरावती देवी, रमाकांत, बुधराम, रामफल, सुरेंद्र, देवमन, रविंदर, अनीता, सुभाष, बृजेश, दिलीप, धर्मेंद्र, कोदई समेत लगभग 40 परिवारों ने प्रशासन से जल्द बिजली, पानी, सड़क और आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र व्यवस्था नहीं की गई तो उन्हें आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
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