संतकबीरनगर के तरकुलवा गांव पहुंची मां लक्ष्मी की प्रतिमा, 20 साल बाद प्रशासन मुस्तैद
कड़े सुरक्षा घेरे में तरकुलवा गांव पहुंची मां लक्ष्मी की प्रतिमा, 20 साल बाद प्रशासन मुस्तैद
- पूरे गांव में दिखा भारी उत्साह का माहौल
बखिरा/संतकबीरनगर। जिले के बखिरा थाना क्षेत्र अंतर्गत तरकुलवा गांव में गुरुवार को कड़ी सुरक्षा और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मां लक्ष्मी की प्रतिमा की स्थापना की गई। इस दौरान पूरे गांव में भारी उत्साह और भक्तिमय माहौल देखने को मिला। श्रद्धालुओं के जयकारों और बैंड-बाजे की धुनों के बीच मां लक्ष्मी की प्रतिमा गांव पहुंची, जिससे आयोजन से जुड़े कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों में खासा उत्साह देखा गया। वर्ष 2004 में तरकुलवा गांव से लक्ष्मी प्रतिमा विसर्जन के लिए ढोढ़या ले जाई जा रही थी। मुस्लिम बस्ती के रास्ते से गुजरने के दौरान कुछ लोगों के बीच अचानक विवाद शुरू हो गया, जिसने बाद में एक हिंसक रूप अख्तियार कर लिया था। इस ऐतिहासिक घटना के दौरान पुलिस चौकी में आगजनी भी की गई थी, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी थी। इस पुलिस फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जिसके बाद से क्षेत्र में प्रतिमा ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
तभी से यह पूरा मामला इस क्षेत्र में बेहद संवेदनशील बना हुआ है। इस बार के आयोजन को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने पहले से ही कमर कस ली थी। बीते मंगलवार को जिलाधिकारी अनुज मलिक और पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीणा ने स्वयं भारी पुलिस बल के साथ तरकुलवा गांव का दौरा किया था और सुरक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत का जायजा लिया था। इसके साथ ही, नगर पंचायत प्रशासन की ओर से भी तैयारियां तेज की गई थीं। अधिशासी अधिकारी सीमा राय ने मौके पर पहुंचकर सभी व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया और सड़क के दोनों किनारों पर किए गए अवैध अतिक्रमण को तत्काल हटाने के लिए माइक से मुनादी (घोषणा) भी कराई थी।
गुरुवार को प्रतिमा के आगमन और स्थापना के दौरान प्रशासनिक और पुलिस के आला अधिकारी पूरी तरह सतर्क और मुस्तैद नजर आए। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच अपर पुलिस अधीक्षक, अपर जिलाधिकारी उप जिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी मेंहदावल, थानाध्यक्ष बखिरा और थानाध्यक्ष मेंहदावल समेत भारी संख्या में पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल मौके पर मुस्तैद रहे। प्रशासन और पुलिस का मुख्य प्रयास यह रहा कि प्रतिमा के आगमन और स्थापना का यह पूरा कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हो, ताकि किसी भी श्रद्धालु या स्थानीय नागरिक को किसी प्रकार की असुविधा या परेशानी का सामना न करना पड़े।
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