दुर्गा मंदिर चौराहे का गला घोंटा एनएचएआई ने नियम ताक पर रख चुनवा दी अवैध दीवार
दुर्गा मंदिर चौराहे का गला घोंटा एनएचएआई ने नियम ताक पर रख चुनवा दी अवैध दीवार
संतकबीरनगर। राष्ट्रीय राजमार्ग-27 लखनऊ गोरखपुर मार्ग पर स्थित सैकड़ों वर्ष पुराने दुर्गा मंदिर चौराहा मगहर पर यातायात पुलिस और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की तानाशाही व हठधर्मिता चरम पर पहुँच गई है। सुरक्षा का ढोंग रचते हुए पहले यहाँ लोहे का अवैध बैरियर लगाकर रास्ता रोका गया और अब सारी हदों को पार करते हुए एनएचएआई द्वारा नियम कानून और संविधान की धंज्जियां उड़ाकर चौराहे के बीचों-बीच करीब आधा मीटर ऊँची ईंट की पक्की दीवार चलाया जा रहा है। मौके पर धड़ल्ले से चल रहा यह अवैध निर्माण सीधे तौर पर स्थानीय हजारों ग्रामीणों, किसानों, मजदूरों और छात्रों के मौलिक अधिकारों पर कुठाराघात है। इस तुगलकी फरमान से नगर पंचायत मगहर के मोहल्ला मोहनलालपुर, आजादनगर, तिवारी टोला और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों लोग पूरी तरह त्रस्त हो चुके हैं और उनका दैनिक जीवन नरक बन गया है।
तस्वीरों और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे यातायात पुलिस के बैरियरों की आड़ में मजदूर और मिस्त्री ईंटों से इस पक्के अवरोधक को तैयार कर रहे हैं। विडंबना देखिए कि इस चौराहे के बीचों-बीच इतनी पर्याप्त जगह है कि एक साथ 100 लोग भी सुरक्षित खड़े होकर सड़क पार कर सकते थे इस सबसे सुरक्षित और चौड़े रास्ते को बिना किसी ठोस तकनीकी या कानूनी कारण के जबरन बंद किया जा रहा है। इस कारण मगहर व सहजनवाँ थाना क्षेत्र के दर्जनों गाँवों और स्थानीय मोहल्लों का आपस में सम्पर्क कट सा गया है। दुर्गा मन्दिर चौराहा मगहर पर इतिहास में कभी कोई बैरियर नहीं लगा था। दुर्गा मन्दिर चौराहा मगहर को यदि प्रशासन दुर्घटना-संभावित मानता है तो वहाँ बैरियर लगाकर रास्ता रोकना कोई वैज्ञानिक या तार्किक समाधान नहीं है। जनहित में यह अत्यंत आवश्यक है कि इस अवैध बैरियर व ईंट की दीवार को अविलंब हटाकर इसके स्थान पर तत्काल कन्वेक्स मिरर, रंबल स्ट्रिप्स, रिफ्लेक्टिव चेतावनी संकेत बोर्ड, डेलीनेटर, सौर ऊर्जा संचालित ब्लिंकर्स, थर्माेप्लास्टिक पेंटिंग और हाई-मास्ट लाइट जैसी अनिवार्य व्यवस्थाएं स्थापित की जाएं।
इस गंभीर समस्या को लेकर पिछले ही महीने सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता कुलदीप मिश्र ने प्रधानमंत्री केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक तथा परियोजना निदेशक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण गोरखपुर को लिखित पत्र भेजकर लोहे के इस अवैध बैरियर को तत्काल हटाने की मांग की थी। पत्र के माध्यम से प्रशासन को जनता की दिक्कतों और भविष्य में होने वाले हादसों के प्रति सचेत किया गया था। लेकिन संवेदनहीन प्रशासन ने जनहित की इस बेहद जरूरी मांग को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। लोहे का बैरियर हटाना तो दूर, आज उल्टे यहाँ बेहद तेजी से ईंट की स्थाई दीवार चुननी शुरू कर दी गई।
प्रशासन के इस अड़ियल और तानाशाही रवैये से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्कूल जाने वाले नौनिहाल और छात्र समय से स्कूल नहीं पहुँच पा रहे हैं और जान जोखिम में डालकर डिवाइडर फाँद रहे हैं। गंभीर मरीज एम्बुलेंस के इंतजार में दम तोड़ने को मजबूर हैं और घुटनों के दर्द से लाचार बुजुर्गों को मीलों का चक्कर काटना पड़ रहा है। नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि यदि सुरक्षा के नाम पर खड़ी की जा रही यह अवैध दीवार किसी मासूम या वृद्ध की जान लेती है, या जनता के सब्र का बांध टूटता है तो इसकी समस्त जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी।
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