बखिरा में दीपोत्सव ने बढ़ाई स्वदेशी दीयों की मांग
बखिरा में दीपोत्सव ने बढ़ाई स्वदेशी दीयों की मांग
-स्थानीय कुम्हारों को मिला सहारा
संतकबीरनगर। बखिरा क्षेत्र में आगामी दीपोत्सव कार्यक्रम के कारण स्वदेशी मिट्टी के दीयों की मांग में भारी वृद्धि हुई है। 17 अक्टूबर को बाबा भंगेश्वर नाथ पोखरे पर आयोजित होने वाले इस भव्य दीपोत्सव कार्यक्रम के लिए हजारों दीये स्थानीय कुम्हारों से खरीदे जा रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से बड़ा सहारा मिला है। स्थानीय कुम्हार राम सिंह प्रजापति ने बताया कि दीपोत्सव में उपयोग होने वाले अधिकांश दीये यहीं के कारीगर बना रहे हैं। इस पहल से कुम्हारों को काफी मदद मिली है, क्योंकि उनकी बिक्री में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है।
लोग अब चीनी लाइटों और प्लास्टिक की सजावट के बजाय पारंपरिक मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता दे रहे हैं। स्थानीय निवासी हरिशंकर साहनी के अनुसार, मिट्टी के दीयों से दीपावली का वास्तविक आनंद मिलता है और ये पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाते। कुम्हार राम मिलन ने बताया कि मांग इतनी बढ़ गई है कि उन्हें दिन-रात काम करना पड़ रहा है। पहले चीनी सामान के कारण बिक्री कम होती थी, लेकिन अब स्वदेशी को बढ़ावा मिलने से उनकी आमदनी दोगुनी हो गई है।
वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत अभियानों का असर बाजार में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। युवा खरीदार गुलशन साहनी का कहना है कि स्वदेशी सामान खरीदना गर्व की बात है, क्योंकि इससे देश के कारीगर मजबूत होते हैं। मिट्टी के दीये बेचने वालों को स्टॉल लगाने की विशेष अनुमति और कर में राहत भी दी जा रही है। व्यापारी मुकेश जायसवाल के अनुसार, सरकारी सहयोग से दीपावली बाजार में बिक्री कई गुना बढ़ी है। कारीगर आधुनिकता को अपनाते हुए रंगीन, डिजाइनर, थीम-आधारित और मंदिर के आकार के दीये बना रहे हैं।
कुम्हारिन श्रृंगारी देवी ने बताया कि लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं, कलश, धूपदान और अन्य सजावटी सामानों की मांग भी बढ़ी है। दीपोत्सव कार्यक्रम के कार्यकर्ता आकाश गौरव, राजेश गुप्ता,सुधीर, शंभू, देवेश, विशाल, रवि और आशुतोष सिंह ने बताया कि वे स्वयं दीपोत्सव कार्यक्रम में मिट्टी के दीयों का उपयोग करते हैं और अपने घरों पर भी मिट्टी के ही दीये ले जाते हैं।
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