जन्म-मरण से मुक्ति भगवान की कथा ही दिला सकती है-आचार्य धरणीधर
जन्म-मरण से मुक्ति भगवान की कथा ही दिला सकती है-आचार्य धरणीधर
संतकबीरनगर। प्रभु भागवत कथा के माध्यम से मानव का यह संकल्प याद दिलाते रहते हैं। भागवत सुनने वालों का भगवान हमेशा कल्याण करते हैं। भागवत में कहा गया है जो भगवान को प्रिय हो वही करो, हमेशा भगवान से मिलने का उद्देश्य बना लो। जो प्रभु का मार्ग हो उसे अपना लो, इस संसार में जन्म-मरण से मुक्ति भगवान की कथा ही दिला सकती है। आचार्य धरणीधर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन में जाने अनजाने रोज कई पाप होते हैं। उनका ईश्वर के समक्ष प्रायश्चित करना ही एकमात्र मुक्ति पाने का उपाय है। उन्होंने ईश्वर आराधना के साथ अच्छे कर्म करने का आह्वान किया। उन्होंने जीवन में सत्संग व शास्त्रों में बताए आदर्शों का श्रवण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सत्संग में वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को बदल सकती है। उन्होंने कहा कि व्यक्तियों को अपने जीवन में क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा, संग्रह आदि का त्याग कर विवेक के साथ श्रेष्ठ कर्म करना चाहिए। आचार्य धरणीधर जी महाराज ने कहा भागवत कथा के दौरान कपिल चरित्र, सती चरित्र, ध्रुव चरित्र, जड़ भरत चरित्र, नृसिंह अवतार आदि प्रसंगों पर प्रवचन दिए। महाराज ने कहा कि भगवान के नाममात्र से ही व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। इस अवसर पर मुख्य यजमान लालजी जायसवाल, जय सिंह, विजय प्रताप सिंह,शंभू नाथ शर्मा,बजरंगी वर्मा,लल्ला जायसवाल,पं कमलापति मिश्र, श्रीनाथ पाण्डेय,श्रवण पाठक,उमेश चंद्र जायसवाल,संतोष कुमार जायसवाल,ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी, श्याम लाल गुप्त समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
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