शिकायत निस्तारण नहीं, सुशासन का सजीव मॉडल बन चुका है संतकबीरनगर”
शिकायत निस्तारण नहीं, सुशासन का सजीव मॉडल बन चुका है संतकबीरनगर”
-लगातार 11 बार प्रदेश में प्रथम रहना संयोग नहीं, प्रशासनिक प्रतिबद्धता और जवाबदेही की बड़ी मिसाल
धनघटा/संतकबीरनगर। आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण में लगातार 11वीं बार प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त कर केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि दर्ज नहीं की है, बल्कि यह साबित कर दिया है कि यदि व्यवस्था संवेदनशील हो, नेतृत्व सक्रिय हो और जनसरोकार प्राथमिकता में हों, तो सरकारी तंत्र जनता के विश्वास का सबसे मजबूत आधार बन सकता है। माह अप्रैल-2026 की प्रदेशीय रैंकिंग में एक बार फिर शीर्ष स्थान हासिल करना इस बात का संकेत है कि जनपद में शिकायतों के निस्तारण को औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जवाबदेही और जनसेवा के मिशन के रूप में लिया गया। खास बात यह है कि आज जब अधिकांश जिलों में शिकायतों के निस्तारण को लेकर आमजन में असंतोष दिखाई देता है, वहीं संतकबीरनगर ने निरंतरता, गुणवत्ता और पारदर्शिता के बल पर अलग पहचान बनाई है। इस उपलब्धि के केंद्र में पुलिस कप्तान संत कबीर नगर की कार्यशैली विशेष चर्चा में रही। जनशिकायतों के प्रति गंभीर दृष्टिकोण, समयबद्ध कार्रवाई, नियमित समीक्षा और अधीनस्थ अधिकारियों की सतत मॉनिटरिंग ने पुलिस प्रशासन को परिणामोन्मुख बनाया।
यही कारण रहा कि आईजीआरएस पर आने वाली शिकायतों का निस्तारण केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिकायतकर्ताओं की संतुष्टि भी सुनिश्चित की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जनपद का एक-दो बार शीर्ष स्थान प्राप्त कर लेना संभव हो सकता है, लेकिन लगातार 11 बार प्रथम रहना प्रशासनिक अनुशासन, टीम वर्क और प्रभावी नेतृत्व का जीवंत प्रमाण है। यह उपलब्धि बताती है कि जनपद में शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को केवल आदेशों के भरोसे नहीं छोड़ा गया, बल्कि हर स्तर पर जिम्मेदारी तय की गई। समीक्षकों के अनुसार, संतकबीरनगर मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहां शिकायतों को “फॉरवर्ड” करने की औपचारिकता के बजाय “समाधान” की मानसिकता विकसित की गई।
अधिकारियों द्वारा शिकायतकर्ताओं से सीधा संवाद, प्रकरणों की गहन समीक्षा और फीडबैक आधारित कार्यप्रणाली ने व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय बनाया। यही वजह है कि जनपद की कार्यप्रणाली अब प्रदेश के अन्य जिलों के लिए अध्ययन और अनुकरण का विषय बनती जा रही है। वर्तमान समय में जब प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर जनता की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं, तब संतकबीरनगर का यह प्रदर्शन सुशासन की उस अवधारणा को मजबूत करता है, जिसमें संवेदनशीलता, जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाती है।
स्पष्ट है कि यह सफलता किसी एक महीने या एक अभियान की उपज नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत, सजग निगरानी और जनहित के प्रति समर्पित प्रशासनिक सोच का परिणाम है। संतकबीरनगर ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और ईमानदार कार्यसंस्कृति हो तो सरकारी तंत्र भी जनता के विश्वास का सबसे प्रभावशाली माध्यम बन सकता है।
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