कालाबाजारी जोरो पर] नहीं मिल रहा उरिया DAP सुपर खाद
डीएपी यूरिया की किल्लत से रवि की बुवाई पर संकट
.कालाबाजारी से महँगा पड़ा अन्नदाताष् का उत्पादन
धनघटाध्संतकबीरनगर। केंद्र और राज्य सरकार जहाँ किसानों की आय दुगनी करने के दावे बार.बार दोहरा रही हैंए वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। इस बार रवि की फसलों की बुवाई शुरू होते ही किसानों को डीएपी और यूरिया की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। गाँव.गाँव के किसान खाद की तलाश में भटक रहे हैंए परंतु सरकारी गोदामों और सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं है। जहाँ कभी.कभी खाद मिल भी रही हैए वहाँ काला बाजारी और अतिरिक्त शुल्क वसूली किसानों की कमर तोड़ रही है।
किसानों के अनुसारए सरकारी दरों पर मिलने वाली डीएपी खाद में व्यापारी जिंक या अन्य उत्पादों का पैक चिपका कर उसे 120 रुपया से 150 तक में बेच रहे हैं। किसानों की मजबूरी है कि वे इसे खरीदेंए क्योंकि बुवाई का समय निकल जाने पर फसल पर सीधा असर पड़ता है। किसान हर साल नवंबर में बुवाई शुरू कर देते हैंए लेकिन इस बार खाद के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है। जो खाद मिल रही हैए वह भी महंगे दामों अपनी पीड़ा बताते हुए क्षेत्र के किस धनपत ओझा राम संत राम शंकर यादव बलिंदर आदि लोगों ने बताया कि इस बार बड़ी समस्या है।
किसानों का आरोप है कि इस गंभीर स्थिति पर न तो स्थानीय जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे हैं और न ही कृषि विभाग के अधिकारी सक्रिय हैं। खाद वितरण केंद्रों पर निरीक्षण के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते खाद की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हुईए तो इस बार रवि फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा। डीएपी और यूरिया के बिना गेहूँए चनाए सरसों जैसी फसलों की पैदावार घट सकती हैए जिससे किसानों की आय बढ़ाने का सरकारी लक्ष्य और दूर हो जाएगा।श्कृषि इनपुट की कमी और महंगाई का सीधा असर किसान की लागत और लाभ पर पड़ता है।
जब बुवाई प्रभावित होगीए तो उत्पादन घटेगा और किसान की आय घटेगीए बढ़ेगी नहीं।श्किसानों ने सरकार से मांग की है कि खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएए कालाबाजारी पर रोक लगे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। अगर हालात नहीं सुधरे तो किसानों के विरोध प्रदर्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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