पूर्व की सरकारों में मनरेगा योजना में घोटाले सामने आये इसलिए हुआ बदलाव- प्रभारी मंत्री
पूर्व की सरकारों में मनरेगा योजना में घोटाले सामने आये इसलिए हुआ बदलाव- प्रभारी मंत्री
-प्रभारी मंत्री ने पूर्व की सरकारो पर लगाई गंभीर आरोप
-100 दिन के कार्यदिवस को बढ़ाकर 125 दिन करने का भाजपा सरकार नें लिया संकल्प
संतकबीरनगर। जिलामुख्यालय स्थित डाक बंगले पर शनिवार को पत्रकारो से बातचीत करते हुए जिलाप्रभारी विजय लक्ष्मी गौतम ने कहा कि देश के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार नें विकसित भारत गारण्टी रोजगार आजीविक मिशन, जी राम जी, बिल दिसम्बर में पास किया है। पूर्व में हमारी जरूरतें अलग-अलग तरह की थी जो समय के बदलाव के साथ आधुनिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था से मेल नहीं खाती थी साथ ही कमजोर मॉनीटरिंग एवं अपर्याप्त सत्यापन के कारण पूर्व की सरकारों में मनरेगा योजना में कई घोटाले सामने आये इसलिए यह बदलाव आवश्यक हो गया था। इस कानून को लाने के पीछे मोदी सरकार की यह मंशा है कि हर गरीब को रोजगार मिले, उसकी गरिमा का सम्मान हो गरीब, जनजाति और पिछड़े को रोजगार मिले। यह अधिनियम राम राज्य की स्थापना की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इस अधिनियम का उद्देश्य ग्रामीण अंचल में ग्रामीणों के जीवन स्तर को और सुधार कर सरकार के खर्च को कौशल सृजन, उच्च गुणवत्ता वाली स्थायी सम्पत्तियों के सृजन और स्थानीय उद्यमों को केन्द्रित करता है जिससे ग्रामीण विकास को विकसित भारत 2047 के संकल्प से जोड़ा जा सके।
इस बिल में नया फंडिग मॉडल लागू किया गया है जिसमें केन्द्र और राज्यों का खर्च 60ः40 सामान्य राज्यों में, 90ः10 उत्तर पूर्व/पहाड़ी राज्यों में तथा केन्द्र शासित प्रदेशों में 100 प्रतिशत केन्द्र सरकार द्वारा दिया जायेगा। इसके अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ग्रामीण विकास को नई दिशा देने का कार्य किया जायेगा। इस अधिनियम के लागू होने से परिवारों को प्रति वर्ष मनरेगा के 100 दिन के कार्यदिवस को बढ़ाकर 125 दिन रोजगार देने का प्रावधान किया गया है। वन क्षेत्र में काम करने वाले अनुसूचित जनजाति के कामगारों को 25 दिन अधिक रोजगार मिलेगा। मनरेगा में श्रमिकों का भुगतान 15 दिन में किया जाता रहा है जिसे घटाकर वीबी-जी रामजी अधिनियम के तहत एक सप्ताह के भीतर करने का प्रावधान किया गया है। यदि किसी कारणवश 125 दिनों का रोजगार नहीं दिया गया तो भत्ता जारी किया जायेगा ऐसा इस बिल में प्रावधान किया गया है। इस अधिनियम से अव्यवस्थित कार्यों के बजाय जल सुरक्षा एवं प्रबंधन जिससे खेती को बढावा मिलेगा, आजीविका, परिसम्पत्तियों एवं जलवायु बदलाव से निपटने में सक्षम एवं स्थायी ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर ध्यान दिया जायेगा साथ ही सड़कों के निर्माण से बाजार में सुधार आयेगा। इस अधिनियम में विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं शुरुआत की गयी जो राष्ट्रीय स्पेशल फ्रेम वर्क के अनुरूप हाइपर लोकल डेटा आधारित योजना को संभव बनाती है।
जी०पी०एस० मोबाइल मॉनीटरिंग के साथ रियल टाइम डेटा अपलोड किया जायेगा तथा ए0आई0 के माध्यम से धोखाधड़ी की पहचान भी की जायेगी। तकनीकी आधारित पारदर्शिता से भ्रष्टाचार समाप्त होगा मनरेगा से इतर इस अधिनियम में ग्रामीण क्षेत्रों में बुवाई/कटाई के दौरान 60 दिनों तक सार्वजनिक कार्य स्थगित किये जाने की व्यवस्था की गयी है ताकि कृषि कार्य में मजदूर उपलब्ध रहें तथा कृषि उत्पादकता की लागत में भी कमी आयेगी। इसलिए यह योजना मनरेगा से बेहतर सिद्ध होगी। इस अधिनियम से रोजगार की संख्या बढ़ेगी और ग्रामीणों के जीवन स्तर में पहले से अधिक सुधार होगा और भारत विकसित राष्ट्र बनेगा। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष नीतू सिंह, खलीलाबाद विधायक अंकुर राज तिवारी, मेंहदावल विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी, धनघटा विधायक गणेश चन्द्र चैहान, समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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