जीव को कभी अभिमान नहीं करना चाहिए-आचार्य धरणीधर
जीव को कभी अभिमान नहीं करना चाहिए-आचार्य धरणीधर
संतकबीरनगर। मेंहदावल उत्तर पट्टी कस्बे में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस आचार्य धरणीधर जी महाराज ने कहा धनवान व्यक्ति वही है जो अपने तन, मन, धन से सेवा भक्ति करे वही आज के समय में धनवान है। परमात्मा की प्राप्ति सच्चे प्रेम के द्वारा ही संभव हो सकती है। पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि पूतना राक्षसी ने बालकृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी।
श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही पूतना का वध कर उसका कल्याण किया। माता यशोदा जब भगवान श्री कृष्ण को पूतना के वक्षस्थल से उठाकर लाती है उसके बाद पंचगव्य गाय के गोबर, गोमूत्र से भगवान को स्नान कराती है। सभी को गौ माता की सेवा, गायत्री का जाप और गीता का पाठ अवश्य करना चाहिए।आचार्य धरणीधर जी ने कहा कहा कि सदा अपने नेत्र, श्रवण और वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। क्योंकि जैसा हम सुनते हैं, देखते हैं, ठीक वैसा ही आचरण करते हैं। ये आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप क्या देख रहे हैं, क्या सुन रहे हैं।
देखना और सुनना अगर सुधरा हुआ हो, अच्छा हो तो व्यक्ति कभी गलत रास्ते पर नहीं जाएगा। जो उचित हो हमेशा वहीं देखो और सुनो। भगवान के नाम का आश्रय लो, सत्संग करो, वहीं हमारे साथ जाएगाआचार्य श्री ने कंस द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना के वध की कथा सुनाई, जिसमें नन्हे कृष्ण ने स्तनपान करते हुए उसका वध किया था।इसके पश्चात, उन्होंने माखन चोरी की लीलाओं का वर्णन किया। कथा का महत्वपूर्ण प्रसंग गोवर्धन लीला रहा। आचार्य जी ने बताया कि इंद्र के अभिमान को तोड़ने और ब्रजवासियों को घनघोर वर्षा से बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया था।
यह प्रसंग धर्म की विजय और भगवान की सर्वशक्तिमानता को दर्शाता है। इस अवसर पर मुख्य यजमान लालजी जायसवाल,डा.योगेन्द्र भारती,अतुल सिंह,लोकेश सिंह, अन्नू सिंह, कल्याण गुप्ता, आचार्य पं.कमलापति मिश्र, ओम प्रकाश पाण्डेय, महेन्द्र पाण्डेय, शिवशंकर वर्मा, शंभुनाथ शर्मा, बटुकनाथ त्रिपाठी, जय सिंह, श्याम जायसवाल समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
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