यूजीसी के विरोध में संतकबीरनगर कलेक्ट्रेट पर गरजा स्वर्ण समाज, एडीएम को सौंपा ज्ञापन
यूजीसी के विरोध में संतकबीरनगर कलेक्ट्रेट पर गरजा स्वर्ण समाज, एडीएम को सौंपा ज्ञापन
यूजीसी के विरोध में कलेक्ट्रेट पर गरजा स्वर्ण समाज, एडीएम को सौंपा ज्ञापन
संतकबीरनगर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की हालिया नीतियों के विरोध में बुधवार को जिला मुख्यालय पर एक विशाल जन आक्रोश रैली आयोजित की गई। अपने संबोधन में अखिलेश पाण्डेय व धीरज पाठक नें कहा कि यूजीसी की नीतियों को उच्च शिक्षा की स्वतंत्रता, शिक्षकों की भूमिका तथा छात्रों के अवसरों पर “प्रतिकूल” बताया और इसे “काला कानून”, “तानाशाही निर्णय” व “लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत” करार दिया। भीड़ ने उठाई शैक्षणिक स्वतंत्रता, समान अवसर और पारदर्शिता की मांग हाथों में तख्तियां व बैनर लेकर प्रतिभागियों ने शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर, पारदर्शिता, शैक्षणिक स्वायत्तता बहाल करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि यूजीसी की नीतियों के परिणामस्वरूप विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म होगी और शिक्षा क्षेत्र बाजारीकरण एवं प्रबंधन नियंत्रण में आ जाएगा। इस अवसर पर शशि शेखर पाठक उमेश उपाध्याय सत्यम मिश्रा सुधीर पाठक राजेश पाठक मनोज पाठक अनुराग ओझा सूरज तिवारी हरिशंकर भट्ट भूपेन्द्र सिंह रजनीश सिंह केशव नन्दन पाण्डेय तमाम लोग मौजूद रहे।
यूजीसी की नीतियों के विरोध में मेंहदावल में विशाल जन आक्रोश रैली, उपजिलाधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन
मेंहदावल/संतकबीरनगर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की हालिया नीतियों के विरोध में बुधवार को मेंहदावल में एक विशाल जन आक्रोश रैली आयोजित की गई। रैली रोडवेज परिसर से शुरू होकर तहसील परिसर तक शांतिपूर्ण ढंग से निकाली गई, जिसमें भारी संख्या में युवाओं, छात्रों, शिक्षकों एवं स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी की नीतियों को उच्च शिक्षा की स्वतंत्रता, शिक्षकों की भूमिका तथा छात्रों के अवसरों पर “प्रतिकूल” बताया और इसे “काला कानून”, “तानाशाही निर्णय” व “लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत” करार दिया। भीड़ ने उठाई शैक्षणिक स्वतंत्रता, समान अवसर और पारदर्शिता की मांग हाथों में तख्तियां व बैनर लेकर प्रतिभागियों ने शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर, पारदर्शिता, शैक्षणिक स्वायत्तता बहाल करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि यूजीसी की नीतियों के परिणामस्वरूप विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म होगी और शिक्षा क्षेत्र बाजारीकरण एवं प्रबंधन नियंत्रण में आ जाएगा। रैली का नेतृत्व युवा समाजसेवी अनुराग त्रिपाठी, गोलू पाठक भृगुवंशी, संदीप पाठक (सनातनी), अविनाश त्रिपाठी (महाकाल) एवं संगम पांडेय ने किया।
यूजीसी के विरोध में वक्ताओं नें बोला
मेंहदावल/संतकबीरनगर। शिक्षा किसी भी राष्ट्र की नींव है। इससे जुड़ी नीतियां संवाद और विचार-विमर्श के बाद ही बननी चाहिए। यूजीसी के फैसले छात्रों और शिक्षकों की आवाज को अनसुना करते हैं। अविनाश त्रिपाठी ने कहा यूजीसी के तानाशाही फैसलों का विरोध करें। शिक्षा को बाजार नहीं बनने देंगे। छात्रों और शिक्षकों की आवाज को दबाने वाले ऐसे नियम लोकतांत्रिक नहीं, विनाशकारी हैं।,संगम पांडेय ने कहा कि “सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देती है, जबकि यूजीसी नीतियां इसके उलट जातिगत और संस्थागत असंतुलन पैदा कर रही हैं। रैली के पश्चात प्रतिनिधिमंडल तहसील पहुँचा और महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी संजीव राय को सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि यूजीसी की नीतियों की पुनः समीक्षा की जाए और छात्रों, शिक्षकों एवं विश्वविद्यालयों के हितों में संशोधन किए जाएं। समाज का आरोप है कि यह अपराध को जाति और वर्ग से जोड़कर शिक्षा संस्थानों में असमान वातावरण पैदा करेगा। साथ ही ये “नीतियां विश्वविद्यालयों को सरकारी नियंत्रण में लाकर शिक्षा को बाजारीकरण की ओर धकेलेंगी। वक्ताओं ने चेताया कि यदि सरकार ने छात्रों और शिक्षकों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया तो आंदोलन और व्यापक रूप लेगा। हालांकि प्रतिनिधियों ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रहेगा। रैली शांतिपूर्वक सम्पन्न पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ तथा प्रशासन की ओर से सहयोग बनाए रखा गया। रैली के दौरान भारी संख्या में पुलिस व प्रशासनिक कर्मी भी मौजूद रहे।
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