मद्यपान से होता है प्राणशक्ति का नाश
गोरखनाथ मंदिर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ तथा ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि समारोह के अंतर्गत साप्ताहिक सम्मेलन का दूसरा दिन
व्यक्ति, परिवार और समाज के लिए अत्यंत घातक है नशाः प्रो. सोलंकी
-गोरखनाथ मंदिर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ तथा ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि समारोह के अंतर्गत साप्ताहिक सम्मेलन का दूसरा दिन
-वाणी, मन, विचार और स्वभाव को नियंत्रित करना होगाः प्रो. सोलंकी
गोरखपुर। युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर सम सामयिक विषयों पर केंद्रित साप्ताहिक सम्मेलन के दूसरे दिन, शुक्रवार को ‘नशा नाश का कारण है’ विषय पर वक्ताओं से विमर्श किया। मुख्य वक्ता, प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख, स्वामी विवेकानंद केंद्र उत्तर प्रदेश, प्रो. विनोद सोलंकी ने कहा कि नशा व्यक्ति, परिवार और समाज के लिए अत्यंत घातक है। स्वयं, परिवार और समाज के विकास के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति नशे से दूर रहे। गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में आयोजित सम्मेलन में प्रो. सोलंकी ने कहा कि हमें हमेशा स्मरण रखना चाहिए कि हम ‘वीर भोग्या वसुंधरा’ रूपी भारतभूमि की संतान हैं। हमें उसी ऊर्जा के साथ जीवन जीना है। सुखी जीवन की कल्पना हमारे मन से होती है और मन के भी अनेक व्यसन होते हैं। उन पर नियंत्रण करना ही मन का नियंत्रण है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि जब वे कठिन विषय पढ़कर थक जाएं तो उपनिषदों की बोध कथाओं का अध्ययन करें। इससे जीवन सुंदर से सुन्दरतम होता जाएगा। उपनिषदों के ऋषियों का संदेश जागृति का संदेश है।
प्रो. सोलंकी ने कहा कि हमें अपने जीवन की यात्रा पशु-मानव से मानव-मानव और वहां से दिव्य मानव बनने की ओर करनी है। इसके लिए हर क्षण जागरूक रहकर अपनी वाणी, मन, विचार और स्वभाव को नियंत्रित करना होगा। इसके लिए संतों के साहित्य का अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अपने व्यसनों में ‘विद्या-व्यसन’ को जोड़ना चाहिए। भगिनी निवेदिता तथा स्वामी विवेकानंद के उदाहरणों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के पतन के कारणों में संस्कृत भाषा का विलुप्त होना भी एक कारण रहा है। संस्कृत भाषा ज्ञान-विज्ञान के साथ-साथ मनुष्य को सन्मार्ग पर ले जाने वाली भाषा है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा व्यसन करना चाहिए, जैसा योगी गंभीरनाथ जी महाराज, महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने किया तथा आज गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ जी महाराज कर रहे हैं। हमें भी राष्ट्रभक्ति, गोरक्षा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का व्यसन करना चाहिए।
मद्यपान से होता है प्राणशक्ति का नाश
इस अवसर पर कटक, ओडिशा से पधारे महंत शिवनाथ जी महाराज ने कहा कि नशे के दुष्प्रभावों को जानने के बाद भी लोग उस पर नियंत्रण नहीं कर पाते। उन्होंने गोरखनाथ जी के वचनों का उदाहरण देते हुए कहा कि मद्यपान से प्राणशक्ति का नाश होता है तथा भांग और तंबाकू के सेवन से ध्यानशक्ति का ह्रास होता है। इनका सेवन करने वालों को इसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं। प्रो. शिवशरण दास, पूर्व आचार्य, रसायनशास्त्र विभाग, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर ने कहा कि इस पवित्र प्रांगण में आकर ‘नशा’ शब्द बोलने में ही उन्हें अपराधबोध हो रहा है। उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं से गायत्री मंत्र एवं देवी मंत्र का उच्चारण कराया और उनके अर्थ भी बताए। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन एक बार ही मिलता है और यह अनमोल है।
इसे इस प्रकार जीना चाहिए कि इसके बाद किसी अन्य जीवन की कल्पना की आवश्यकता ही न पड़े। नशा व्यक्ति को विनाश की ओर ले जाता है। नशे से कभी कल्याण नहीं, बल्कि विनाश ही होता है। नशे के कारण शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और सोचने-समझने की शक्ति भी प्रभावित होती है। नशा व्यक्ति को परिवार और समाज से दूर कर एकाकी बनाता है तथा धीरे-धीरे अवसाद की ओर ले जा सकता है। नशे के कारण व्यक्ति अपराध की ओर भी बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी द्वारा नशामुक्ति के लिए अनेक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं तथा वर्ष 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने का आह्वान किया गया है।
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