तीन करोड़ पचीस लाख रूपए की अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले में दर्ज एफआईआर से हड़कंप
तीन करोड़ पचीस लाख रूपए की अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले में दर्ज एफआईआर से हड़कंप
नाथनगर/संतकबीरनगर। जनपद में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घपलेबाजी पर पर्दा डालने के लिए अपनाए जा रहे हर हथकंडे फेल होते जा रहे हैं। जांच में 3,25,96,960 रूपये के छात्रवृत्ति घपला बाजी की पुष्टि होने के बाद विभाग द्वारा नामित विद्यालय संचालक जो जांच के दौरान अभिलेख उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हो रहे थे, जिला अल्पसंख्यक कार्यालय उन्हें छात्रवृत्ति की हार्ड कापी मुहैया कराकर अभिलेख दुरुस्त भी कराया था। जिला अल्पसंख्यक कार्यालय ही इस घोटाले का मुख्य केन्द्र रहा है। छात्रवृत्ति के करोड़ों के घोटाले की जांच में नियुक्त जांच अधिकारी विद्यालयों में तो पहुंचे, लेकिन उन्हें कहीं कोई अभिलेख न मिलने से बैरंग लौटना पड़ा।
आरोप है कि फिर भी अनुचित आर्थिक लाभ लेकर मामले में लीपापोती करने का भरपूर प्रयास जांच अधिकारियों द्वारा किया गया था। तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रवीण कुमार मिश्रा ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी छात्रवृत्ति घोटाले को सरकार द्वारा संचालित अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजनान्तर्गत के वर्ष 2021-22 में नवीन श्रेणी के 59 संस्थाओं एवं नवीनीकरण श्रेणी के 34 संस्थाओं तथा 2022-23 में नवीन श्रेणी के 9 संस्थाओं एवं नवीनीकरण श्रेणी के 10 संस्थाओं के छात्र/छात्राओं की सूची उपलब्ध कराते हुए सूची में अंकित शैक्षिक संस्थाओं एवं उनमें नामांकित छात्र/छात्राओं का सत्यापन का निर्देश दिया था। जिसके क्रम में जिलाधिकारी ने विकास खण्ड नाथनगर, सेमरियावां, पौली, हैंसर बाजार, बघौली एवं बेलहरकला के अन्तर्गत आने वाले शैक्षिक संस्थाओं के सत्यापन कराया गया था। अधिकांश विद्यालयों में छात्रवृत्ति से संबंधित अभिलेख ही नहीं मिले।
सूत्रों के मुताबिक अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घपलेबाजी में संस्था के जिम्मेदारों के अलावा जिला अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय की भी पूरी पूरी भागेदारी प्रतीत रही है। बताया जाता है कि तत्कालीन छात्रवृत्ति आवेदन को फॉरवर्ड करने की जिम्मेदारी अल्पसंख्यक कार्यालय में तैनात एक संविदा कर्मों की थी। जिसकी तैनाती वर्तमान में नियमों को ताक पर रख कर कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में विभाग ने कर रखी है। अगर निष्पक्षता से छात्रवृत्ति आवेदन फॉरवर्ड करने वाले अल्पसंख्यक कर्मचारियों की जांच की जाए तो इस घोटाले की तह तक पहुंचा जा सकता है। और एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया जा सकता है। छात्र वृत्ति घोटाले को लेकर तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रवीण कुमार मिश्रा ने 19 जून 2025 को कोतवाली खलीलाबाद में बीएनएस की 316(2) बीएनएस 316(4) में कुल 46 संस्थाओं के 98 लोगों पर नामजद एफ आई आर दर्ज कराया था। लेकिन छात्रवृत्ति घोटाले बाजों की रसूखदारी को लेकर दर्ज मुकदमे की विवेचना अधर में लटकी रही।
अब जब निदेशालय सख्त हुआ तो विवेचना में तेजी ला दी गई है। जिससे छात्रवृत्ति घोटाले बाजों के होश उड़ गए हैं। धनघटा तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों में रहने वाले जिनके खाते में वजीफे की रकम पहुंची है, पुलिस उन्हें नोटिस थमाकर उनका ब्यान ले रही है। रविवार को महुली थाना क्षेत्र के ग्राम छितही में दुधारा थाना में तैनात एसएसआई प्रमोद यादव पहुंचकर जिनके खाते में वजीफे की रकम गई है, उनका ब्यान लिए। इसी तरह धनघटा थाना क्षेत्र के पौली, पारा, नावन कर्मा आदि गांवों के कुछ लोगों को भी पुलिस ने नोटिस देकर बयान दर्ज कराई है। आरोपियों के घर पुलिस की दस्तक से छात्रवृत्ति घपलेबाजों की एक बार से बेचौनी बढ़ गई है। देखना यह है कि आगे किस प्रकार की कार्रवाई की जाती है।
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