मौनी अमावस्या पर प्रशासनिक मुस्तैदी की मिसाल बने चौकी प्रभारी लोहरैया
सख्त यातायात प्रबंधन से श्रद्धालुओं को मिला सुरक्षित और सुगम स्नान का अवसर
मौनी अमावस्या पर प्रशासनिक मुस्तैदी की मिसाल बने चौकी प्रभारी लोहरैया
-सख्त यातायात प्रबंधन से श्रद्धालुओं को मिला सुरक्षित और सुगम स्नान का अवसर
धनघटा/संतकबीरनगर। मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर रविवार को बिरहार घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूरदृदराज से आए श्रद्धालु सरयू नदी में आस्था की डुबकी लगाने के लिए उत्साहित थे। ऐसे में यातायात व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती थी। इसी चुनौती को बखूबी निभाया चौकी प्रभारी आशुतोष त्रिपाठी ने, जिन्होंने अपनी सूझबूझ, कर्तव्यनिष्ठा और सख्त अनुशासन से एक उदाहरण प्रस्तुत किया। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की थीं।
धनघटा चैराहे को प्रमुख नियंत्रण बिंदु बनाते हुए चौकी प्रभारी आशुतोष त्रिपाठी पुलिस कर्मियों के साथ पूरे दिन मुस्तादी से डटे रहे। उन्होंने भारी वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाकर यातायात को सुचारु बनाए रखा, जिससे जाम की स्थिति उत्पन्न न हो और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। दिनभर कई प्रभावशाली लोगों और वाहन चालकों द्वारा नियमों को तोड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन चैकी प्रभारी आशुतोष त्रिपाठी अपने कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह सजग रहे। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि कानून सभी के लिए समान है। किसी भी दबाव या सिफारिश को महत्व दिए बिना उन्होंने नियमों का सख्ती से पालन कराया। यही कारण रहा कि श्रद्धालु बिना किसी अवरोध और अफरा-तफरी के सरयू नदी तक पहुंच सके और शांतिपूर्ण ढंग से स्नान कर सके। आशुतोष त्रिपाठी की कार्यशैली में अनुशासन के साथ-साथ संवेदनशीलता भी देखने को मिली। उन्होंने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता देते हुए पुलिस बल को मानवीय दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश दिए।
जगह-जगह तैनात पुलिस कर्मियों ने भी सहयोगात्मक रवैया अपनाया, जिससे प्रशासन और जनता के बीच विश्वास की भावना और मजबूत हुई। मौनी अमावस्या जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में जिस तरह से यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को संभाला गया, वह प्रशंसनीय है। चैकी प्रभारी आशुतोष त्रिपाठी ने यह साबित कर दिया कि यदि प्रशासनिक अधिकारी ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें, तो बड़े से बड़ा आयोजन भी सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सकता है। उनकी इस कार्यकुशलता और निष्ठा की क्षेत्र में सराहना हो रही है, जो अन्य अधिकारियों के लिए भी प्रेरणास्रोत है।
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