कानून को अपने टायरों से रौंद रहे अवैध रूप से चल रहे ट्रैकों क़े चालक

Apr 26, 2026 - 17:41
कानून को अपने टायरों से रौंद रहे अवैध रूप से चल रहे ट्रैकों क़े चालक

कानून को अपने टायरों से रौंद रहे अवैध रूप से चल रहे ट्रैकों क़े चालक
-धनघटा-खलीलाबाद मार्ग पर ओवरलोड ट्रकों का ‘खुला खेल’, प्रशासन मूकदर्शक
धनघटा/संतकबीरनगर। जनपद के धनघटा- खलीलाबाद मार्ग पर इन दिनों एक खतरनाक और चिंताजनक खेल खुलेआम खेला जा रहा है। रात 9 बजे के बाद इस मार्ग पर ओवरलोड ट्रकों की आवाजाही आम बात हो गई है। इन ट्रकों पर त्रिपाल डालकर न सिर्फ माल को छिपाया जाता है, बल्कि कानून को भी खुलेआम चुनौती दी जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल प्रशासनिक दफ्तरों और पुलिस थानों के ठीक सामने से गुजरता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, धनघटा तहसील गेट, थाना गेट और खलीलाबाद तक कई पुलिस चौकियों के सामने से ये ट्रक बेखौफ गुजरते हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है? आम जनमानस में चर्चा है कि बिना प्रशासनिक मिलीभगत के यह संभव नहीं है।

आरोप यहां तक हैं कि एक स्थानीय “सेटिंग सिस्टम” के तहत तय हिस्सेदारी ऊपर तक पहुंचाई जा रही है, जिसके चलते जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन ट्रकों में से अधिकांश के पास वैध कागजात तक नहीं हैं। कई ट्रकों पर नंबर प्लेट नहीं होती, जिससे यदि कोई दुर्घटना हो जाए तो ऐसे वाहनों की पहचान करना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि आम लोगों की जान को भी खतरे में डालती है। यातायात विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। जहां एक ओर छोटी गाड़ियों और आम नागरिकों पर सख्ती दिखाई जाती है, वहीं इन भारी-भरकम ओवरलोड ट्रकों के सामने विभाग पूरी तरह निष्क्रिय नजर आता है। यह दोहरा रवैया आम जनता के बीच नाराजगी और अविश्वास को जन्म दे रहा है।कुछ दिन पहले रायबरेली जिले में इसी तरह के अवैध परिवहन नेटवर्क का खुलासा हुआ था, जिसमें कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे। इसके बावजूद संत कबीर नगर में स्थिति जस की तस बनी हुई है। यहां कार्रवाई के बजाय “समझौते” की चर्चा ज्यादा सुनाई देती है। परिणामस्वरूप सरकार को राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि अवैध कमाई का खेल निर्बाध जारी है। यह पूरा मामला प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। क्या कारण है कि जिन स्थानों से रोजाना अधिकारी और पुलिस गुजरती है, वहीं से अवैध ट्रक बिना रोक-टोक निकल जाते हैं? क्या यह केवल लापरवाही है या फिर सुनियोजित अनदेखी?

क्या बोले एसडीएम धनघटा 


धनघटा/संतकबीरनगर। एसडीएम धनघटा ने बताया कि “पुलिस का बेहतर सहयोग नहीं मिल पाता है। फिलहाल मैं बाहर हूं, दो दिन बाद अभियान चलाकर कार्रवाई करूंगा।” थाना प्रभारी धनघटा दिलीप सिंह ने बताया “मामले को संज्ञान में लेकर अभियान चलाकर जांच की जाएगी।” एआरटीओ खलीलाबाद प्रियंवदा सिंह का फोन रिसीव नहीं हुआ।  

खनन विभाग के अधिकारी के साथ मिलकर बहुत जल्द चलाऊंगा अभियान- सीओ यातायात


धनघटा/संतकबीरनगर। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह बयान महज औपचारिकता बनकर रह जाते हैं या वाकई जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई होती है। जनता को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि सख्त कदमों की जरूरत है। अगर जल्द ही इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। प्रशासन को समझना होगा कि कानून का डर खत्म होना किसी भी समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा होता है। धनघटा-खलीलाबाद मार्ग पर जो कुछ हो रहा है, वह सिर्फ एक सड़क की कहानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल है। 

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