सचिवों के आंदोलन में आई तेजी, ग्राम पंचायतों के वित्तीय संचालन का कार्य किया ठप
सचिवों के आंदोलन में आई तेजी, ग्राम पंचायतों के वित्तीय संचालन का कार्य किया ठप
- ब्लॉक वार सचिवों ने एडीओ पंचायत कार्यालयों में जमा किए अपने अपने डोंगल
- अपनी मांगों के समर्थन मे प्रदेश संगठन के निर्देश पर सचिवों ने आंदोलन को किया तेज
संतकबीरनगर। उपस्थिति प्रणाली सहित अन्य मूल विभागीय कार्यों के अतिरिक अन्य विभागों के कार्यों की दी जाने वाली जिम्मेदारी के खिलाफ सचिवों का आंदोलन अब तेज होता नजर आ रहा है। सोमवार को जिले के सभी ब्लॉक मुख्यालयों सचिवों ने अपने अपने डोंगल सामूहिक रूप से एडीओ पंचायत कार्यालयों में जमा कर दिया गया। जिससे ग्राम पंचायतों के विकास के लिए वित्तीय संकट उत्पन्न हो सकता है।
सचिवों के प्रदेश संगठन द्वारा शांतिपूर्ण सांकेतिक आंदोलन के शुरुआती चरण में ही मांगें न माने जाने की दशा में डोंगल जमा करने की चेतावनी दी जा चुकी थी। जिले के सभी नौ ब्लॉकों के सचिवों ने सोमवार को प्रदेश संगठन के निर्देश पर अपने अपने एडीओ पंचायत कार्यालयों पर सामूहिक रूप से अपने डोंगल जमा करा दिए। सांथा ब्लॉक में ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष क्षितिज चैधरी तथा खलीलाबाद ब्लॉक में ग्राम विकास अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष विपिन चंद के नेतृत्व में सभी सचिवों ने अपने डोंगल सामूहिक रूप से एडीओ पंचायत कार्यालय में जमा करके अपना विरोध जताया। नाथनगर, हैसर बाजार, पौली, मेहदावल, बघौली, बेलहर और सेमरियावां ब्लॉक के सचिवों ने भी सामूहिक रूप से अपने डोंगल एडीओ पंचायत कार्यालय में जमा कराकर शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध जताया। सचिवों के इस कदम से अब जिले की ग्राम पंचायतों से ग्राम निधि के खाते का संचालन ठप हो गया है।
इससे गांवों के विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष क्षितिज चैधरी ने कहा कि सचिवों के ऊपर पहले से ही विभागीय जिम्मेदारियों का बड़ा बोझ होता है। संसाधनों के अभाव में खुद की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के साथ ही अन्य विभगीय जिम्मेदारियां भी डाल दी जाती है। ऐसे में अब ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली के दायरे में लाकर उनके उत्पीड़न का आधार तैयार किया जा रहा है जो बेहद निंदनीय है। ग्राम विकास अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष विपिन चंद ने कहा कि सचिव गांव के विकास की महत्वपूर्ण इकाई होता है।
शासन की विकासोन्मुखी योजनाओं को धरातल पर उतारने और उसे पारदर्शी बनाने की का भी दायित्व सम्हालना पड़ता है। उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों द्वारा तमाम मौखिक रूप से दी जाने वाली अन्य जिम्मेदारियों के निर्वहन का जिम्मा भी उठाना पड़ता है। बिना किसी अतिरिक्त देय के सभी निर्देशों का पालन करना पड़ता है। ऐसे में फील्ड के कर्मचारी के लिए ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली थोपना अन्याय पूर्ण है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगे नही मानी जाती यह आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन के दौरान सचिव प्रशांत यादव, शिव प्रकाश सिंह, गणेश त्रिपाठी, धर्मेंद्र यादव, एकता सिंह, गिरजेश कुमार, शैलेंद्र यादव, अलाउद्दीन, पुनीता विश्वकर्मा, सतीश मौर्य, अजीत शर्मा, अम्बरीष पटेल, अनिल सिंह, शिव मूरत मौर्य, अभिनव रवि वत्स, कर्णजीत सिंह यादव, विकास श्रीवास्तव, शिवेंद्र कुमार, जितेंद्र कुमार, देवेश गोस्वामी, भारती शर्मा, सौरभ चैधरी, अवनीश गौड़, संतोष पाण्डेय, देश दीपक वर्मा, पवन पांडेय सहित सभी सचिव मौजूद रहे।
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