अगेती तोरिया की खेती से किसान भाई बढ़ा सकते हैं अतिरिक्त आय

Sep 17, 2026 - 17:21
अगेती तोरिया की खेती से किसान भाई बढ़ा सकते हैं अतिरिक्त आय

अगेती तोरिया की खेती से किसान भाई बढ़ा सकते हैं अतिरिक्त आय
संतकबीरनगर। जनपद के कृषक भाइयों की जानकारी एवं जागरूकता के दृष्टिगत कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बताया गया कि जनपद के किसानों के खेत खरीफ फसलों, विशेषकर धान एवं मक्का की कटाई के बाद खाली हो जाते हैं, वे कम अवधि में तैयार होने वाली अगेती तोरिया की खेती अपनाकर खेत का बेहतर उपयोग करने के साथ अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं। अगेती तोरिया एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है, जिसकी वैज्ञानिक खेती से कम समय में उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है तथा इसके बाद गेहूं, चना एवं अन्य रबी फसलों की समय से बुवाई भी संभव है। डॉ. देवेश कुमार, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, ने बताया कि अगेती तोरिया की खेती धान अथवा मक्का की कटाई के बाद उपलब्ध कम अवधि का प्रभावी उपयोग करने का अच्छा विकल्प है।

समय से बुवाई करने पर फसल अनुकूल तापमान एवं मिट्टी की नमी का लाभ उठाती है तथा जल्दी तैयार हो जाती है। इससे किसान अगली रबी फसल की बुवाई समय से कर सकते हैं। प्रारंभिक बुवाई से देर से पड़ने वाले पाले, अधिक तापमान तथा माहू जैसे प्रमुख कीटों के प्रकोप का प्रभाव भी अपेक्षाकृत कम किया जा सकता है। उन्होंने किसानों से अगेती तोरिया की खेती में वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की अपील की।

 डॉ. धर्मेन्द्र कुमार, वैज्ञानिक, पादप प्रजनन, कृषि विज्ञान केंद्र, ने बताया कि तोरिया की अल्प अवधि के कारण यह उन किसानों के लिए उपयोगी फसल है, जो खरीफ फसल की कटाई के बाद कम समय में अतिरिक्त उत्पादन एवं आय प्राप्त करना चाहते हैं। सामान्यतः सितंबर के दूसरे पखवाड़े से अक्टूबर के प्रथम सप्ताह तक इसकी बुवाई उपयुक्त रहती है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ती उत्पादन लागत एवं सीमित कृषि संसाधनों को देखते हुए अगेती तोरिया किसानों के लिए एक प्रभावी फसल विकल्प बन सकती है। संतुलित खाद एवं उर्वरक प्रबंधन के लिए मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करना सबसे अच्छा है।

 खेत की तैयारी के समय सड़ी हुई गोबर की खाद अथवा कम्पोस्ट का प्रयोग करें। सिंचाई एवं खरपतवार नियंत्रण हेतु फसल में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है। फूल आने की अवस्था के आसपास पहली तथा दाना भरने की अवस्था में दूसरी सिंचाई लाभकारी हो सकती है। फसल की प्रारंभिक अवस्था में खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी करेंरू-फसल में आरा मक्खी, माहू एवं अन्य प्रमुख कीटों की नियमित निगरानी करनी चाहिए। अधिक देर करने पर फलियां चटकने से दाने खेत में गिरकर नुकसान हो सकता है।

कटाई के बाद फसल को अच्छी तरह सुखाकर मड़ाई एवं सफाई करनी चाहिए। कृषि विज्ञान केंद्र, ने किसानों से अपील की है कि खरीफ फसलों की कटाई के बाद खेत को खाली छोड़ने के बजाय उपलब्ध समय एवं मिट्टी की नमी का उपयोग करते हुए अगेती तोरिया की वैज्ञानिक खेती अपनाएं। इससे तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों को अतिरिक्त आय तथा रबी फसलों की समय से बुवाई का लाभ मिल सकता है।

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