चार माह बाद सोनमती को आया होश परिजनों में खुशी की लहर
चार माह बाद सोनमती को आया होश परिजनों में खुशी की लहर
-मुख्य उद्देश्य मरीजों को क्षेत्र में ही कम कीमत में महानगरों जैसी उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा मिल सके-के पी राव
-डॉ. विकास चन्द्र राव की देखरेख में उनकी टीम ने सोनमती का शुरू किया था इलाज
संतकबीरनगर। खलीलाबाद-बखिरा मार्ग पर स्थित करैली चैराहे पर रामरति मेमोरियल हॉस्पिटल पर ग्राम बघुआ निवासी 50 वर्षीय सोनमती को चार महीने बाद होश आया। प्राप्त जानकारी के अनुसार विकास खंड बघौली अंतर्गत ग्राम पंचायत बघुआ निवासी 50 वर्षीय सोनमती को चार माह पूर्व ब्रेन हमरेज हो गया था परिवार के लोगों ने मेडिकल कॉलेज गोरखपुर ले गए जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद होश ना आने के कारण घर पर ले जाकर सेवा करने के लिए सलाह दिया। परिजनों ने मेडिकल कॉलेज से करैली स्थित रामरति मेमोरियल हॉस्पिटल करैली पर ले आया जहां पर मौजूद डॉक्टरो ने प्राथमिक उपचार के बाद अपने वाहन एडमिट कर लिया। उपचार के दौरान चार महीने बाद सोनमती को होश आया।
सोनमती की बहू प्रिया ने बताया कि मेरी सासू माता सोनमती को अब चार महीने बाद होश आ गया है अब वह आवाज व लोगों को पहचान पा रही हैं। जहां डाक्टर को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है। आधुनिकता का दौर,ग्लैमर व धन के पीछे भागने में चिकित्सक भी रेस के घोड़े की तरह भाग रहे हैं लेकिन अभी कुछ चिकित्सक सेवाभाव से कार्य करते हुए मानवता का परिचय दे रहे हैं। जिससे मरीजों को नया जीवन मिल रहा है। बधुआं निवासिनी लगभग 50 वर्षीया महिला सोनमती की रामरती मेमोरियल अस्पताल करैली में चार माह बाद होश आया। मरीज ने आंखे खोली तो परिजनों के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई।
50 वर्षीया महिला सोनमती पत्नी रामअचल की तबियत 19 अगस्त को अचानक खराब हो गई। सोनमती की बहू प्रिया ने बताया कि सास को ब्रेनहैमरेज हो गया। इलाज के लिए गोरखपुर ले गये। जहां डाक्टरों ने हालत गंभीर बताते हुए रेफर कर दिया। दूसरे अस्पताल में ले गये वहां डाक्टरों ने मरीज के कोमा में चले जाने की बात बताई। मरीज को घर ले जाकर सेवा-सत्कार करने की सलाह दी जिससे परिजन काफी परेशान हो गये। बहू ने बताया कि 21 अगस्त को मरीज को लेकर करैली स्थित रामरती मेमोरियल अस्पताल पहुंचे जहां डाक्टर डॉ. विकास चन्द्र राव की देखरेख में उनकी टीम ने मरीज को भर्ती करके दवा इलाज शुरू किया। डॉ. मनीषा राव ने भी इलाज में पूरा सहयोग किया और इलाज सफल रहा। बीते 23 दिसम्बर को मरीज को चार माह बाद होश आ गया। उसने आंखे खोली तो परिजनों के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गयी। जिसके बाद चिकित्सकों एवं स्टाफ ने राहत की सांस ली। करैली में विगत लगभग तीन दशक से यह अस्पताल मरीजो का ईलाज कर रहा है। मैनेजिंग डायरेक्टर के पी राव ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में अस्पताल खोलने का मुख्य उद्देश्य है कि ग्रामीण क्षेत्र के गंभीर मरीजों को क्षेत्र में ही कम कीमत में महानगरों जैसी उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा मिल सके।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
